नहीं रहे मैथिली के लोकप्रिय कवि किंकर, मैथिली साहित्य जगत में शोक की लहर

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स्व किंकर जी

समस्तीपुर। बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व कैलाश झा किंकर नहीं रहे। वो एक नेक दिल साहित्यकार थे, जिन्होंने सरकारी सेवा (शिक्षक) में रहते हुए, भी अपनी विशिष्ट छाप कवि एवं संपादन में छोड़ गये ।दर्जनों पुस्तक की रचना की, सैंकड़ों विशिष्ट कवि सम्मेलन का आयोजन कर सम्पूर्ण मिथिला मैं अपना एक विशिष्ट पहचान बना लिया था। स्वभाव से मृदुल एवं कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी के रुप में वो सदा सदा याद किये जाएँगें। उनके आकस्मिक निधन पर दूरभाष पर शोक व्यक्त करते हुए अन्तर्राष्ट्रीय कवि डा, बुद्धि नाथ मिश्र, मिथिला शिक्षा मंच सम्बद्ध अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद् के संयोजक प्रो पी के झा प्रेम मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा के सिनेट सदस्य डा, विजय कुमार झा, स्वामी सत्यानंद जी, डा, परमानन्द लाभ, गजलकार गोविन्द राकेश,विधापति परिषद के महासचिव डा, रमेश झा आदि ने किंकर जी के निधन को मिथिला एंव मैथिली भाषीयों के लिए अपूरणीय क्षति बताया हैं।

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