गरीब कल्याण योजना के तहत प्रवासियों के लिए केंचुआ खाद एवम मशरूम उत्पादन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

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सेहत, समृद्धि और स्वावलंबन का बेजोड़ कॉम्बो है मशरूम उत्पादन – डॉ दिव्यांशु,
जाले (दरभंगा) को। कृषि विज्ञान केंद्र जाले में शुक्रवार से 70 प्रवासियों के लिए तीन दिवसीय मशरूम उत्पादन एवम केंचुआ खाद उत्पादन तकनीक विषय पर दो अलग अलग प्रशिक्षण शुरू हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ वर्चुअल विधि से डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के प्रधान वैज्ञानिक सह नोडल पदाधिकारी केविके डॉ. ब्रजेश शाही ने किया। इस अवसर पर डॉ. शाही ने प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मशरूम एवम केंचुआ खाद उत्पादन दोनों कम लागत में अधिक मुनाफा प्राप्त करने का बेहतर साधन है। इच्छुक किसान व युवा सुगमता से अपने आसपास उपलब्ध संसाधनों एवं प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान से इसे व्यवसाय के रूप में आरंभ कर सकते है।
उन्होंने बताया कि केंचुआ की से किसान अपनी खाद की ताकत की पूर्ति के साथ साथ अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते है। वहीं मशरूम उत्पादन के द्वारा वे अपने प्रोटीन युक्त पोषाहार के साथ साथ इसे व्यवसायिक रूप अपना कर लाभान्वित भी हो सकते है। डॉ शाही ने बताया कि इस प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षु सरकार के विभिन्न ऋण योजनाओं से लाभ भी प्राप्त कर सकते है। मौके पर केंद्र के अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर ने कहा कि प्रशिक्षण विशेष तौर पर प्रवासी मजदूरों के लिए चलाया जा रहा है। जिससे वे ग्रामीण स्तर पर काम लागत में अपना जीवकोपार्जन कर स्वावलंबन और समृद्धि प्राप्त सकते है। डॉ दिव्यांशु ने कहा कि सेहत, समृद्धि और स्वावलंबन का बेजोड़ कॉम्बो है मशरूम उत्पादन। वहीं मृदा की सेहत और किसानों के स्वावलंबन और समृद्धि का बेहतर विकल्प है केंचुआ खाद उत्पादन। मौके पर केंद्र के सभी वैज्ञानिक व कर्मी मौजूद थे।

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