Home Education One हठ त्याग कर 14-16 का अनुदान दे सरकार – प्रो गणेश

हठ त्याग कर 14-16 का अनुदान दे सरकार – प्रो गणेश

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वित्त रहित कर्मियों के लिए लगाई गुहार

समस्तीपुर बिहार इंटरमेडियेट शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ पटना के महासचिव प्रो गणेश प्रसाद सिंह के हवाले से सचिव सह प्रवक्ता प्रो प्रवीण कुमार झा प्रेम ने दूरभाष पर बताया कि महासंघ के महासचिव प्रो गणेश प्रसाद सिंह ने बिहार के मुख्यमंत्री,उपमुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, प्रधान सचिव, शिक्षा विभाग के अपर सचिव, एवं बिहार विधालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष को पत्र के माध्यम से वितरहित के साथ हो रहे अन्याय की ओर ध्यान आकर्षित कराने का प्रयास किया है। प्रो सिंह ने पत्र में कहा है कि वित्तरहित शिक्षा नीति समाप्त किए जाने वाले राज्य सरकार के संकल्प 538 में, शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक एक लाख की आबादी पर राष्ट्रीय मानक के अनुसार 13 इण्टरमीडिएट स्तर की शिक्षा देने वाली संस्था की आवश्यकता है, जबकि बिहार में एक लाख की आबादी पर उपलब्धता मात्र5-6ही है ऐसे में वित्तरहित अनुदानित इण्टरमीडिएट कालेज को अनुदानित किया जाना इसलिए आवश्यक है कि ऐसे शैक्षणिक संस्थानों के पास भूमि,भवन आदि उपलब्ध है साथ ही शिक्षक-कर्मचारी हैं, संस्थाओं के माॅंग और पूर्ति के गैप को वित्तरहित संस्थाओं के द्वारा पूरा किया जा सकता है। इस बात को शिक्षा विभाग, अपने संकल्प538दिनांक 19/05/2009के द्वारा स्वीकार कर, संस्थापकों से उपलब्ध, भूमि,भवन, उपस्कर, शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी की नियुक्ति की प्रक्रिया आदि उपलब्ध संसाधनों के संदर्भ में शपथपत्र के साथ आवेदन आमंत्रित किए तथा,उसका भौतिक सत्यापन, स्थलीय जांच कराकर, पुनः समेकित जांच की पुष्टि सचिवालय स्थित मदनमोहन झा सभागार में बिहार सरकार शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पदाधिकारी, एवं सम्बन्धित जिला शिक्षा पदाधिकारी, मिलकर जांच कराकर पुनः संस्थापकों से शपथपत्र दाखिल कराया गया। तब जा कर अनुदान देने की प्रक्रिया प्रारंभ किया गया। 2013-15तक पुनः तृतीय पक्ष की तृस्तरीय जांच कराकर अनुदान के गतिरोध को यह कहकर जांच कराया गया कि यह अन्तिम जांच है। जब जब अनुदान के बदले वेतनमान तथा अनुदान की राशि सीधे शिक्षक कर्मचारी के खातों में भेजे जाने की मांग की गई ताकि अनुदान की राशि के विचलन को रोका जा सके तो उसको दबा देने के लिए नया नया बखेड़ा खड़ा कर, सम्बद्धता का बेवाहियात मुद्दों को उठाया गया है, जबकि सभी अनुदानित इण्टरमीडिएट कालेज 1992 बिहार इण्टरमीडिएट शिक्षा परिषद् अधिनियम से पूर्व से प्रस्वीकृत है। 1994 नियमावली एवं निरसन विधेयक 2007 से आक्षादित है। उन्होंने कहा है कि सरकार अनुदान के बदले वेतनमान देने वाले निर्णय लें और शिक्षक कर्मचारी के खातों में राशि भेजें, तत्काल प्रभाव से विज्ञप्ति संख्या160/2020 पर रोक लगाते हुए, शैक्षणिक सत्र2014-16 का स्वीकृत अनुदान निर्गत किया जाए। ताकि अपने तीन पीढ़ियों के अरमानों की कुर्बानी देने के बाद इन शिक्षा कर्मियों को बिहार के शैक्षणिक विकास में योगदान का सुफल प्राप्त हो

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