शिक्षकों के हाइकोर्ट के फैसले के खिलाफ दौड़ाया व सेवाशर्त के नाम पर चुनावी गेम

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  • शिक्षकों के सेवाशर्त व ईपीएफ़ लाभ की घोषणा : महज़ एक छलावा – रामचंद्र राय।
  • छली सरकार के छलपूर्ण घोषणाओं के विरुद्ध कल संकुल पर नियोजित शिक्षक करेंगे सेवाशर्त की प्रति का दहन।

बिहार पंचायत-नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव  रामचंद्र राय ने बयान जारी कर कहा कि 74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर गांधी मैदान से माननीय मुख्यमंत्री ने पंचायत एवं नगर निकाय के तमाम नियोजित शिक्षकों को सिर्फ सेवाशर्त एवं ईपीएफ देने की जो घोषणा की है; यह और कुछ नहीं, शिक्षकों के साथ किया जा रहा महज़ एक छल है।बिहार के तमाम नियोजित शिक्षक छली सरकार के छलपूर्ण रवैये से अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। श्री राय ने यह भी कहा- एक तरफ जहां आम नियोजित शिक्षक सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों में कदम से कदम मिलाकर अपना महत्वपूर्ण सहयोग देते आ रहे हैं वही सरकार को आम नियोजित शिक्षकों की जैसे कोई फिक्र ही नहीं है। आम नियोजित शिक्षक अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कहीं सरकारी ऋण तो कहीं महाजन के सूद तले दबे हुए हैं। अपने बच्चों की शिक्षा दीक्षा या शादी विवाह जैसी आवश्यकताओं के लिए भी उन्हें काफी आर्थिक तंगी झेलनी पड़ती है। ऐसे आर्थिक और मानसिक रुप से परेशान शिक्षक से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना बेईमानी सी लगती है।

ऐसे में सरकार द्वारा इस प्रकार की छलपूर्ण घोषणा यह दर्शाता है कि सरकार सूबे के शिक्षक और शिक्षा के प्रति संवेदनशील नहीं है।

ऐसे में प्रदेश के तमाम नियोजित शिक्षक समान वेतनमान के साथ-साथ नियमित शिक्षकों की भांति हुबहू सेवाशर्त, पुरानी पेंशन, राज्यकर्मी का दर्जा, प्रोमोशन, स्थानान्तरण, माननीय पटना हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में ईपीएफ के लाभ से संबंधित मुद्दों सहित सात सूत्री मांगों के समर्थन में सरकार के इस छलपूर्ण घोषणा के खिलाफ अपने-अपने संकुल पर कल नियोजित शिक्षक करेंगे सेवा शर्त की प्रति का दहन।

श्री राय ने यह भी कहा कि शिक्षक कोरोना के इस कालखंड में सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का कार्य किया है। शिक्षकों ने कोरोना काल में अपनी जान को जोखिम में डालकर जिस प्रकार से प्रवासियों की सेवा की, नामांकन पखवाड़े को चलाया, बच्चों को चावल वितरण के कार्य को पूरा किया, डीबीटी के माध्यम से बच्चों के खाते में राशि भेजवाने के साथ-साथ प्रवासियों का मतदाता सूची में नाम जोड़वाने के अलावे चुनाव से संबंधित अन्य कार्यों को सफलता पूर्वक पूरा करने का कार्य किया है। ऐसे कर्मठ और जुझारू शिक्षकों के हित में यदि सरकार नहीं सोचेगी तो आने वाले हर चुनाव में NDA की सरकार को मुंह की खानी पड़ेगी।

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