हर जुबान क्रोधातिरेक में लड़खड़ा रही है, हर गला रुंधा सा है, इस सदमे से खामोश कलम भी आग उगलने…

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#अपने बेटे हवलदार अमन कुमार सिंह की मौत# चीन का कायराना हरकत#

ONE NEWS LIVE NETWORK BIHAR

SAMASTIPUR| SANJAY RAJA|

आज दिनकर जी के चंद पंक्तियां जिला के बेटे अमन कुमार सिंह पर सटीक बैठती है

जला अस्थियाँ बारी-बारी
चिटकाई जिनमें चिंगारी,
जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर
लिए बिना गर्दन का मोल
कलम, आज उनकी जय बोल। कायर चीन के शर्मनाक हरकत के कारण लेह लद्दाख सीमा पर तैनात जवानों के लिए हर आंखे नम किन्तु रक्तरंजित है, हर जुबान क्रोधातिरेक में लड़खड़ा रही है, हर गला रुंधा सा है, इस सदमे से खामोश कलम भी आग उगलने को बेताब है। देश की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध अपने दायित्व का निर्वहन करते वीर सपूतों की शहादत पर पूरा देश स्तब्ध है। इस जंग मै समस्तीपुर ने भी अपना लाल खोया है। अपने बेटे हवलदार अमन कुमार सिंह की मौत की खबर के बाद अमन का पैतृक गांव ही नहीं प्रखंड भी नहीं पूरा जिला शोकाकुल है। हर सड़क मोहिउद्दीन नगर के सुल्तानपुर निवासी अमन के पिता सुधीर कुमार सिंह के घर की और मूड गए प्रतीत होते हैं। महज 25 साल के अमन कुमार बिहार के समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीन नगर के सुल्तानपुर गाँव के मूल निवासी थे। वह भारतीय सेना के उन 20 सैनिकों में से एक थे, जिन्होंने 15 जून की रात को गालवान घाटी में भारतीय सैनिकों और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिकों के बीच हुई हिंसक मुठभेड़ में अपनी जान गंवा दी थी। पिछले वर्ष ब्याह कर अाई मां भारती के इस सपूत की पत्नी मीनू देवी की हालत देख कर पत्थर भी फुट फुट कर रो पड़े। पिता सुधीर कुमार सिंह, मां रेणु देवी, दो भाई और एक बहन का हाल भी कुछ अलग नहीं। अमन का बड़ा भाई दिल्ली में एक प्राइवेट फर्म में काम करता है और सबसे बड़ी बहन बिहार पुलिस में है। उसका छोटा भाई अपने माता-पिता के साथ रहता है।शहीद अमन के पिता ने बताया कि अमन 2014 में भारतीय सेना में शामिल हुआ था और उसे 16 बिहार रेजिमेंट में शामिल किया गया था। उन्होंने फरवरी 2019 में शादी की और इसी साल फरवरी में लेह-लद्दाख क्षेत्र में तैनात थे। लेह-लद्दाख रवाना होने से पहले आठ दिनों के लिए आखरी बार घर आया था। बिलखते पिता ने बताया कि बीती रात सेना की कॉल के माध्यम से मेरे बेटे की शहादत की खबर मिली। मुझे गर्व है कि मेरे बेटे ने अपना जीवन कर्तव्य की श्रेणी में रखा। मेरे भीतर गुस्से की भावना है और सीमा पर मारे गए हर सैनिक के लिए 18 सिर चाहिए।” सुधीर कुमार सिंह ने कहा, मैं अपने छोटे बेटे को भी मातृभूमि की सेवा के लिए सेना में भेजने को तैयार हूं। मां ने कहा पिछले 2 जुन को ही तो उससे बात हुई थी। सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि लेह लद्दाख के लिए रवाना होने से पहले, अमन ने अपने पिता से वादा किया कि वह जुलाई में घर लौट आएगा और दिल्ली में अपने दिल की बीमारी का इलाज करवाएगा। उसको क्या पता था कि वह अंतिम यात्रा पर ही निकल रहा है।
साल लगे हुईं थी शादी, मौत को क्यूं लाज न अाई
नई जगह ना उसको भाई,
बिलख रही मां औे नई लुगाई।

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