संस्कृत दिवस पर उठी इस देव भाषा को मातृभाषा बनाने की मांग

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समस्तीपुर। संस्कृत एक ऐसी भाषा हैं, जिसके संबर्धन से हम सभी समस्या का समाधान निकाल सकते हैं। संस्कृत भाषा को आज वैज्ञानिक भी आधार बना रहे हैं। इसकी महता पर एक स्वर से देश के बड़े बड़े विद्वान अपनी सहमति दे रहे हैं। सोमवार को संस्कृत दिवस के अवसर पर लाक डाउन के कारण ऑन लाइन बैठक में संस्कृत विकास संस्थानम्, वासुदेव पुर के कार्यक्रम संयोजक प्रो पी के झा प्रेम ने संबोधित करते हुए उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि -आज पूरा विश्व करोना संकट से निजात पाने के लिए भारत की ओर देख रहा है, जबकि हम अपने संस्कृति से दूर होते चले जा रहे हैं। इस ऑन लाइन बैठक में दरभंगा से डॉ जय शंकर झा, डॉ हेमचन्दर राय, डॉ आनन्द ठाकुर, मुम्बई से सुमित सुमन, बरेली से डॉ धनाकर ठाकुर, वाराणसी से डा,कमलेश झा, इंदौर से नैंन्सी झा, बलिया (उ, प्र), से साधना प्रजापति, जयपुर से पल्लवी सिंह चौहान, दलसिंहसराय से डा, उमेश कांत चौधरी, शुशांत चन्द्र मिश्र,पटना से डा, परमानन्द लाभ, बेगूसराय से आचार्य संजय शास्त्री और स्वामी सत्यानंद जी महाराज आदि ने भारत सरकार से संस्कृत को मातृभाषा के रुप स्थापित करने की मांग की है।

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