मुख्यमंत्री की घोषणा से शिक्षक संघ काफी असंतुष्ट

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  • *नीतीश सरकार समान वेतनमान सहित सात सूत्री मांगों को करे पूरा – रामचंद्र राय*
  • *सिर्फ सेवाशर्त व ईपीएफ संबंधी राज्य सरकार की घोषणा से शिक्षकों में असंतोष- प्रदेश महासचिव रामचंद्र राय*

ONE NEWS NETWORK BIHAR|समस्तीपुर।

बिहार पंचायत-नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव सह समस्तीपुर जिलाध्यक्ष रामचंद्र राय ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि 74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर गांधी मैदान से माननीय मुख्यमंत्री ने पंचायत एवं नगर निकाय के तमाम नियोजित शिक्षकों को सिर्फ सेवाशर्त एवं ईपीएफ देने की जो घोषणा की है।बिहार के तमाम नियोजित शिक्षक संघ माननीय मुख्यमंत्री की इस घोषणा से काफी असंतुष्ट हैं। श्री राय ने यह भी कहा कि 15 वर्षों का संघर्ष तथा हाल के 78 दिनों का हड़ताल इसी समझौता पर समाप्त हुआ था कि शिक्षकों की समस्याओं का सम्मानजनक समाधान किया जाएगा। क्या सिर्फ सेवाशर्त एवं ईपीएफ ही सम्मानजनक समाधान है? शिक्षकों का हड़ताल समान वेतनमान के साथ-साथ नियमित शिक्षकों की भांति हुबहू सेवाशर्त, पुरानी पेंशन, राज्यकर्मी का दर्जा, प्रोमोशन, स्थानान्तरण, माननीय पटना हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में ईपीएफ के लाभ से संबंधित था। उन्होंने कहा कि शिक्षक कोरोना के इस कालखंड में सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का कार्य किया है। शिक्षकों ने कोरोना काल में अपनी जान को जोखिम में डालकर जिस प्रकार से प्रवासियों की सेवा की, नामांकन पखवाड़े को चलाया, बच्चों को चावल वितरण के कार्य को पूरा किया, डीबीटी के माध्यम से बच्चों के खाते में राशि भेजवाने के साथ-साथ प्रवासियों का मतदाता सूची में नाम जोड़वाने के अलावे चुनाव से संबंधित अन्य कार्यों को सफलता पूर्वक पूरा करने का कार्य किया है। वहीं राज्य सरकार द्वारा 15 अगस्त को सिर्फ सेवाशर्त एवं ईपीएफ की बात करना शिक्षकों की पीठ में खंजर घोपने के समान है। श्री राय ने राज्य सरकार के उपरोक्त घोषणा पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि एक ओर जहां प्रधानमंत्री शिक्षानीति और आत्मनिर्भरता पर जोर दे रहे हैं वहीं बिहार सरकार इससे इतर शिक्षकों के आत्मसम्मान और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के साथ खेल खेल रही है । शिक्षक जब तक स्वयं की मूलभूत आवश्यकताओं के लिए जद्दोजहद करते रहेंगे तब तक प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना बेईमानी सी है। राज्य सरकार शिक्षकों का आर्थिक, सामाजिक व मानसिक रुप से शोषण करना बंद करें।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सूबे की शिक्षा और शिक्षकों के अस्तित्व को बचाना राज्य सरकार का काम है। अगर शिक्षकों का अस्तित्व नहीं बचता है तो आगामी विधानसभा चुनाव में वर्तमान सरकार का भी अस्तित्व नहीं बचेेगा।

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