मांग और खपत के अनुपात में उत्पादन बहुत कम – डॉ दयाराम

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मांग और खपत के अनुपात में उत्पादन बहुत कम – डॉ दयाराम, प्रशिक्षण के दूसरे दिन प्रवासियों ने जाना दूधिया मशरूम उत्पादन के तरीके

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समस्तीपुर। बिना खेत की खेती मशरूम सेहत, स्वास्थ्य एवं समृद्धि का बेजोड़ कॉम्बो है। सबसे खास बात यह है कि मशरूम का उत्पादन दर बाजार में मांग और खपत के अनुपात में काफी कम है। उक्त बातें डीआरपीसीएयू के मशरूम मैन डॉ दया राम ने अपने संबोधन में कही। बताते चलें कि मंगलवार को डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के तत्वाधान में एवं युवा सौर्य, बिशनपुर समस्तीपुर के सहयोग से समस्तीपुर प्रखंड में अखिल भारतीय मशरूम अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत जारी प्रशिक्षण के दूसरे दिन प्रशिक्षुओं को दूधिया मशरूम उत्पादन के तरीके बताए गए। प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में डॉ सुधा नंदनी के द्वारा के उत्पादन के बारे में सैद्धांतिक रूप से बताया गया जबकि द्वितीय सत्र में मशरूम तकनीक के परियोजना निदेशक दयाराम जी एवं उनके सहयोगी तकनीकी अधिकारी मुकेश कुमार एवं मशरुम विभाग के अन्य कर्मी सुभाष कुमार, रवि, मुन्नी इत्यादि के सहयोग से सभी प्रतिभागियों को दूधिया मशरूम उगाने के तरीकों का प्रायोगिक में मशरूम के बीज को लगाना, पैकेट बनाना एवं मशरुम तोड़ कर संधारण करना इत्यादि सिखाया गया। ज्ञातव्य हो कि समस्तीपुर प्रखंड के मोदी व एवं बिशनपुर गांव के 25 प्रवासी जो कोविड-19 संक्रमण रोकथाम के लिए हुए लॉकडाउन से पहले तक मुंबई नई दिल्ली नासिक इलाहाबाद लखनऊ इत्यादि में काम कर अपना एवं अपने परिवार का गुजर-बसर करते थे के स्वरोजगार के लिए मशरूम उत्पादन का यह प्रशिक्षण उन्हें युवा सौर्य सामाजिक संस्था के सहयोग से दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के सफल आयोजन में विश्वविद्यालय के सूचना तकनीकी के विशेषज्ञ स्नेह संसार और अर्जुन कुमार का लगातार सहयोग रहा है एवं मशरूम निदेशालय के निदेशक डॉ बी पी शर्मा का मार्ग निर्देशन लगातार मिला है जिससे प्रशिक्षण सुचारू एवं नियमित संचालित हो रहा है और प्रवासी श्रमिक इसका लाभ ले रहे हैं।

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